सच बोलने के लिए गीता की कसम खाई जाती है तो पढ़ा क्यों नहीं सकते? एक्टर का सवाल, लोग करने लगे ऐसे कमेंट्स
गुजरात में स्कूलों के सिलेबस में भगवद गीता को जोड़ दिया गया है। इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिल रहे हैं। लोगों ने स्कूल में भगवद गीता पढ़ाए जाने को हिजाब मुद्दे से जोड़ दिया है। लोगों का कहना है कि जब स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, तो गीता क्यों पढ़ाई जा रही है।
रामायण में राम की भूमिका निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल ने भी इस मु्द्दे को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने ट्विटर का सहारा लेते हुए इस निर्णय का विरोध करने वालों से सवाल किया है। उन्होंने लिखा,” सत्य बोलने के लिए गीता पर हाथ रखकर कसम खाई जाती है, तो सत्य जानने के लिए गीता पढ़ाई क्यों नहीं जाती? जय श्री राम।” उनके ट्वीट पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी हैं।
गोस्वामी सुप्रिया गिरी ने इस ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, ”तो क्या गीता पर हाथ रखकर बोलने वाले सच बोलते हैं? इस देश के बच्चे को किसी भी सब्जेक्ट से मतलब नही क्यूंकि बच्चे संस्कारहीन हो रहे हैं। तो ऐसे में गीता की पढ़ाए ठीक है, पर क्या ऐसे बच्चे गीता को सम्मान दे पाएंगे? भड़काना आसान है पर फ्यूचर बच्चे की सम्मान नीति को देना होगा।”
राहिल नाम के यूजर ने लिखा, ”बस यही, इसी में उलझे रहो सब। बस धर्म के नाम पर मूर्ख बनते रहो। ये मत बोलो की और स्कूल-कॉलेज बनाए। इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा हो। पढ़ाई और अस्पताल पर कभी बात नहीं करनी है।”
वहीं शशिकांत द्विवेदी ने लिखा,”गीता जीवन का सार है। कोई पाठ्य पुस्तक नहीं कि उसे पढ़ाया जाये। सत्यान्वेषी गीता स्वयं पढ़ते हैं। गीता कोई धर्मग्रन्थ भी नहीं है। फिर भी आपको लगता है कि इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाये तो अपनी पार्टी से ये मांग क्यों नहीं करते? जय श्रीराम।प्रभात चौधरी ने लिखा, ”काफी गंभीर विचार है, मेरे हिसाब से ऐसा होना चाहिए।”
भगवद गीता का विरोध करने वालों के लिए अवंतिका राजपूत ने लिखा, ”यदि आपको अपने धर्म का प्रचार करना राजनीतिक लगता है कृप्या आप शांति से बैठ जाइए। तब तक इंतजार कीजिए जब किसी जिहादी का हाथ आपके गिरेबान तक न पहुंच जाए। तभी आपको समझ में आएगा। जय श्री राम जी।”
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