शाहरुख़ खान और गौरी खान को मिली निराशा, जज विवि पाटिल ने 2 शब्दो से बदल दिया मामला
आर्यन खान को अदालत से रिहाई कोई भी खबर नहीं मिल रही है. इसके साथ ही शाहरुख़ खान और आर्यन खान की माँ गौरी खान को बेटे को घर पर देखने के लिए लम्बा इंतज़ार करना पड़ रहा है. बॉलिवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार के लाडले आर्यन खान की जमानत याचिका सेशंस कोर्ट से भी खारिज हो गई है. बुधवार को जज वीवी पाटिल ने दोपहर बाद करीब 2:45 बजे इस ममाले में अपना फैसला सुनाया. इससे पहले 14 अक्टूबर को मामले में दो पक्षों की जिरह पूरी हो गई थी और जज ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. बुधवार को कानूनी जानकार से लेकर फैंस को भी यही उम्मीद थी कि जज आर्यन की रिहाई को लेकर फैसला सुनाएंगे, लेकिन ऐसा हो न सका. दिलचस्प बात यह भी रही कि 5 दिन से अधिक वक्त लेने के बाद जज वीवी पाटिल ने कोर्टरूम में आकर सिर्फ ‘दो शब्द’ कहे और इन दो शब्दों ने शाहरुख-गौरी की ‘मन्नत’ को चकनाचूर कर दिया.
बुधवार को तय समय के हिसाब से करीब 11 बजे जज वीवी पाटिल कोर्ट रूम पहुंचे. वहां पहले से आर्यन के खान के वकील अमित देसाई और सतीश मानशिंदे के जूनियर मौजूद थे. एनसीबी की तरफ से ASG अनिल सिंह या अद्वैत सेठना तब तक कोर्ट नहीं पहुंचे थे. जज वीवी पाटिल ने आने के साथ ही रूटीन मैटर्स की सुनवाई शुरू की. बताया गया कि आर्यन खान की जमानत का मामला 22वें नंबर पर लिस्टेड हैं. इस बीच कोर्ट में सतीश मानशिंदे भी आ गए. शाहरुख खान की मैनेजर पूजा ददलानी भी कोर्ट पहुंचीं और एनसीबी के वकील भी आ गए. दोपहर 12 बजे तक कोर्ट में लिस्टेड 14 मामलों का निपटारा हो चुका था. बताया गया कि आर्यन खान केस पर दोपहर लंच के बाद 2:45 बजे फैसला सुनाया जाएगा. लंच के बाद ऐसा ही हुआ.

करीब 2:45 बजे जज वीवी पाटिल कोर्टरूम में पहुंचे और सिर्फ दो शब्दों में ऑपरेटिव ऑर्डर सुनाया. उन्होंने सिर्फ दो शब्द कहें- बेल रिजेक्टेड. जज सिर्फ इतना कहकर वहां से चले गए. वकीलों को बताया कि यह ऑपरेटिव ऑर्डर है और आर्यन के साथ ही बाकी दों आरोपियों अरबाज और मुनमुन की जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई है.
कोर्टरूम के अंदर जज के इन दो शब्दों से गहमागहमी बढ़ गई. पूजा ददलानी ने फोन पर शाहरुख और गौरी को तत्काल खबर दी. जाहिर तौर पर जज वीवी पाटिल के इन दो शब्दों ने 17 दिनों की उस ‘मन्नत’ को चकनाचूर कर दिया है, जो शाहरुख-गौरी ऊपरवाले से लगातार मांग रहे हैं. लेकिन कानूनी लड़ाई यहां खत्म नहीं हुई है. आर्यन के वकीलों को अब जमानत के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा. लेकिन उससे पहले सबसे जरूरी है कि सेशंस अदालत की ऑर्डर कॉपी. ऐसा इसलिए कि ऑर्डर कॉपी देखने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कोर्ट ने किस आधार पर जमानत की याचिका खारिज की है.
कोर्टरूम के बाहर आए वकीलों से जब मीडिया ने बात करने की कोशिश की तो बताया कि जब तब ऑर्डर की कॉपी नहीं आती, चाहकर भी हाई कोर्ट में बेल अप्लीकेशन की तैयारी नहीं की जा सकती है. बताया यह भी जा रहा है कि ऑर्डर कॉपी आने में देर हो सकती है. ऐसे में बहुत संभव है कि बुधवार को चाहकर भी आर्यन के वकील जमानत के लिए हाई कोर्ट नहीं पहुंच पाएंगे. समझा यही जा रहा है कि NCB की ओर से आर्यन पर लगाए गए ‘साजिश के आरोप’ को कोर्ट ने गंभीरता से लिया है. एनसीबी ने 14 अक्टूबर की सुनवाई में कहा कि आर्यन खान के फोन से वॉट्सऐप चैट्स बरामद हुए हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में ड्रग्स मंगवाए जाने बात की बात है. इस बातचीत में एक विदेशी भी शामिल है और अंदेशा है कि आर्यन खान इंटरनैशनल ड्रग्स तस्करी में शामिल हैं.
आर्यन खान के वकीलों अमित देसाई और सतीश मानशिंदे के लिए आगे का रास्ता अब इतना भी आसान नहीं होगा. ऐसा इसलिए कि सेशंस अदालत से ऑर्डर कॉपी आने के बाद जहां उन्हें नए सिरे से हाई कोर्ट में जमानत की याचिका देनी होगी, वहीं ऊपरी अदालत में उस तर्क को भी गलत साबित करना होगा जिसके आधार पर सेशंस अदालत ने जमानत खारित की है. अब क्योंकि एनसीबी की जांच जारी है, ऐसे में हाई कोर्ट में इस केस पर नए सिरे से बहस भी हो सकती है.
जाहिर तौर पर आर्यन खान का पता अभी के लिए अब आर्थर रोड जेल ही है, जहां उनकी पहचान कैदी नंबर- 956 है. आर्यन खान को 2 अक्टूबर को मुंबई से गोवा जा रही क्रूज पर रेव पार्टी में छापेमारी के बाद एनसीबी ने पहले हिरासत में लिया और फिर गिरफ्तार कर लिया था. इस मामले में आर्यन के साथ 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि अब तक इस मामले में 20 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. आर्यन को पहले 3 दिनों तक एनसीबी की कस्टडी में रखा गया था, जिसके बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
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